Tuesday, October 7, 2014

‘दशहरा अर्थात कम से कम दस अवगुणों को हरना’

दिनांक 03, अक्तूबर 2014 को आत्मीय विद्यामंदिर के प्राटंगण में दशहरा का त्योहार मनाया गया। शाम सात बजे तक पाठशाला के सारे छात्र फूटबोल मैदान पर एकत्र हो चुके थे।

सुरज अपना कर्तव्य इस स्थान पर पूरा कर पृथ्वी के किसी और छोर पर गमन कर चुका था एवं लगभग 30 फीट ऊँचा हमारे अवगुण रूप रावण का पुतला चंद्र की चंद्रिका में चमक रहा था। आत्मीय विद्यामंदिर के हिन्दी शिक्षक श्री.मुकेशभाई जोशी ने दशहरा के उत्सव की महिमा बताते हुए कहा कि दशहरा अर्थात इस दिन हमें निश्चय करके कम से कम एक दुर्गुण की आहुति इस अग्नि में देनी है, जिससे आगे का विद्यार्थी-जीवन कार्यकलाप उत्तम छात्र एवं उत्तम नागरिक बनने की तरफ अग्रसर हो।



आत्मीय विद्यामंदिर की प्रणाली—किसी भी कार्य की शुरुआत प्रार्थना-पूजा से होनी चाहिए—इसका वहन करते हुए प्राचार्य श्री विजय सर, आचार्य श्री आशीष सर, महेन्द्र बापा, अर्जुन मामा, अन्य शिक्षक गण, हाउस मास्टर, दिदिज़, संपूर्ण छात्रगण ने भगवान की पूजा अर्चना की। तत्पश्चात स्पोर्ट्स शिक्षक श्री रितेश सर के सहयोग से आधुनिक रोकेट तीर का उपयोग कर रावण का दहन किया। छात्रों का मन उत्सव से आनंदित था।

सभी छात्र अपने अंवगुण एक चिट्ठी में लिखकर लाए थे। श्री रितेश सर ने सभी छात्रों से वो चिट्ठियाँ एकत्र की एवं उसे रावण के दहन में उस आहुति को छात्रों की और से समर्पित की।

यह उत्सव लगभग साँयकाल 7:30 बजे तक चला। पश्चात सभी छात्रों ने शिक्षकगण एवं प्राटंगण में उपस्थित सभी जन सहित भोजनालय की और प्रस्थान किया।

हिन्दी शिक्षक
मुकेशभाई जोशी

Sunday, September 28, 2014

Jal Jhilani Ekadashi 2014: Letting the Almighty to drive our lives

India is blessed with the delightful celebrations, not only fun-filling in life but also spiritually inspiring. Each festival has its own space and significance in India.

One amongst many such festivals, was celebrated at Atmiya Vidya Mandir on 5th September, 2014. Resembling the purification process of body, mind and soul, it is named as Jal Jhilani Ekadashi, one of the most auspicious festival of Hinduism. The celebration took place at school's swimming pool, wherein the whole school was present, from every elderly person to the youngest one.

 
 
The Honourable Principal Sir addressed the students on the occasion and explained the purpose and essence of the celebration. He also explained the spiritual aspect of the celebration and the way one should get his mind and heart engross in it. Few of the messages from his speech are as below.

1. One should bestow full trust in God and Guru and never doubt their ability

2. Offer the complete charge of life to God without any reservations

3. Let God decide the destiny and enlighten the path of life

After the speech, Thakorji's Aarti was performed by all the elderly members of our school. Then came the most awaited moment, Thakorji's Nouka Vihar. One by one, each class students enjoyed the ride of rowing and sailing the boat carrying Thakorji in the water.

Finally, the celebration ended by all enjoying the customary prasad of Cucumber. With this we end, but celebrations never end at Atmiya Vidya Mandir and there still are many more to come on the way.
 
Reported by: Rashmi Ma'am